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अब वो करेंगी लखनऊ से राजनीति जिनके प्रभारी रहते राहुल गाँधी ने गँवाई अमेठी की सीट,

कॉन्ग्रेस का नेतृत्व ऐसा मानता है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा में तमाम गुण उनकी दादी इंदिरा गाँधी जैसे हैं। कॉन्ग्रेस से जुड़े लोगों के मुताबिक़ अगर पार्टी को कोई मज़बूत कर सकता है तो वह प्रियंका ही हैं, जबकि बुनियादी स्तर पर उनकी रणनीतियों का असर कम ही देखने को मिलता है।

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा को मिले आदेश के मुताबिक़, उन्हें सरकारी घर खाली करना है। लगभग साल भर पहले उनकी एसपीजी सुरक्षा भी वापस ली गई थी, इन दो घटनाओं के बाद राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हो रही है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अब वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की ओर रुख कर सकती हैं। साल 2022 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने हैं और यहाँ कॉन्ग्रेस पहले ही बहुत बेहतर स्थिति में नहीं है।

साल 2019 के दौरान हुए आम चुनावों में प्रियंका गाँधी वाड्रा को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। प्रदेश में प्रचार से लेकर पार्टी की नींव मज़बूत करने तक सारी ज़िम्मेदारी प्रियंका गाँधी की थी। लेकिन नतीजा यह निकला कि राहुल गाँधी परिवार की सुरक्षित सीट अमेठी तक गँवा बैठे।

प्रियंका गाँधी के उत्तर प्रदेश प्रभारी रहते हुए अमेठी की तुलना में केरल का वायनाड ज़्यादा बेहतर विकल्प साबित हुआ। वायनाड के सहारे राहुल गाँधी कम से कम संसद तक पहुँच गए, नहीं तो वहाँ भी अपनी मौजूदगी नहीं दर्ज करा पाते।

2019 के आम चुनावों में कॉन्ग्रेस कुछ इस हद तक बैकफुट पर आ गई कि उत्तर प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीटों में केवल 2 सीटें ही जीत पाई। एक सीट रायबरेली से सोनिया गाँधी ने जीती थी और वह भी कॉन्ग्रेस की सुरक्षित सीट ही मानी जाती है।

कॉन्ग्रेस का नेतृत्व ऐसा मानता है कि प्रियंका गाँधी वाड्रा में तमाम गुण उनकी दादी इंदिरा गाँधी जैसे हैं। कॉन्ग्रेस से जुड़े लोगों के मुताबिक़ अगर पार्टी को कोई मज़बूत कर सकता है तो वह प्रियंका ही हैं, जबकि बुनियादी स्तर पर उनकी रणनीतियों का असर कम ही देखने को मिलता है।

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की हालत सुधारने की कोशिश में अक्सर वह आम लोगों के सामने झूठे तथ्य, गलत ख़बरें और गलत जानकारियाँ रखती हैं। कोरोना वायरस का प्रभाव बढ़ने के बाद प्रियंका ने योगी सरकार को मज़दूरों के मुद्दे पर घेरने का पूरा प्रयास किया था।

इस मुद्दे पर प्रियंका ने वादा किया था कि वह मज़दूरों को घर वापस भेजने के लिए बस की व्यवस्था कराएँगी लेकिन उनका यह वादा बहुत भरोसेमंद साबित नहीं हुआ। उनके द्वारा दी गई तमाम गाड़ियों का पंजीयन तक ख़त्म हो चुका था। इतना ही नहीं, कुछ गाड़ियाँ तो दो पहिया और तीन पहिया वाहन थे। काफी विवाद होने के बाद उन्हें अपने वाहन वापस बुलाने पड़े थे।

प्रियंका गाँधी वाड्रा साल 1997 से सरकारी बंगले में रह रही थीं। इसके अलावा उन्हें एसपीजी की विशेष सुरक्षा भी मिली हुई थीl यह भी उल्लेखनीय है कि उन्हें इस तरह की तमाम सुविधाएँ तब मिली हुई थीं, जबकि वह किसी सरकारी या प्रशासनिक पद पर भी नहीं थीं।

कुछ समय पहले कॉन्ग्रेस के एक नेता ने सुझाव दिया था कि वह राज्यसभा की सदस्य बन कर सरकारी सुविधाओं का लाभ ले सकती हैं। हालाँकि फिलहाल जिस तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं उनके हिसाब से प्रियंका गाँधी अब उत्तर प्रदेश में ही रहने वाली हैं। ज़्यादा संभावनाएँ हैं कि वह कौल आवास में रह सकती हैं, जो कि इंदिरा गाँधी की मामी शीला कॉल का हैl वह भी कॉन्ग्रेस की सदस्य थीं। अभी यह तय नहीं है कि उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और बच्चे उनके साथ जाएँगे या नहीं।